रांची दर्पण डेस्क। झारखंड हाई कोर्ट ने मुआवजा एवं वंशावली विवाद से जुड़े एक अवमानना याचिका पर सुनवाई के दौरान प्रशासनिक लापरवाही को लेकर कड़ा रुख अपनाया। जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस अरुण कुमार राय की खंडपीठ ने कोर्ट के स्पष्ट आदेश के बावजूद नामकुम अंचलाधिकारी (सीओ) के हाजिर नहीं होने पर तीखी नाराजगी जताई।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि आदेश के आलोक में नामकुम सीओ न तो व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हुए और न ही व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट के लिए कोई आवेदन ही प्रस्तुत किया गया।
इसे गंभीरता से लेते हुए खंडपीठ ने अंचलाधिकारी को निर्देश दिया कि वे अपनी अनुपस्थिति का ठोस कारण बताते हुए स्पष्टीकरण दाखिल करें। साथ ही कोर्ट के आदेश के अनुपालन से संबंधित शपथ-पत्र भी प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है।
हालांकि, कोर्ट के आदेश के अनुसार रांची उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री सशरीर उपस्थित हुए। उपायुक्त की ओर से अदालत को बताया गया कि मामले में पारित आदेश का अनुपालन दो सप्ताह के भीतर सुनिश्चित कर दिया जाएगा। इसके बाद खंडपीठ ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 23 फरवरी की तिथि निर्धारित की।
गौरतलब है कि यह अवमानना याचिका मंशा सिंह उर्फ राजेश सिंह द्वारा दायर की गई है। इससे पूर्व की सुनवाई में हाई कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा था कि संबंधित अपील में 18 दिसंबर 2023 को पारित आदेश का अब तक पालन नहीं किया गया है और न ही इस संबंध में कोई शो-कॉज दाखिल किया गया है। लगातार अनुपालन न होने को न्यायालय ने न्यायिक आदेशों की अवहेलना मानते हुए गंभीर चिंता व्यक्त की थी।
हाई कोर्ट की इस सख्ती से एक बार फिर यह संदेश गया है कि न्यायालय के आदेशों की अनदेखी किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी, चाहे मामला प्रशासनिक अधिकारी का ही क्यों न हो।
