गेतलसूद डैम बन रहा झारखंड का सोलर हब, फ्लोटिंग प्लांट से जल्द मिलेगी 100mw करंट

रांची दर्पण डेस्क। राजधानी रांची के निकट स्थित गेतलसूद डैम अब झारखंड के ऊर्जा मानचित्र पर एक नई पहचान बनाने जा रहा है। यहां निर्माणाधीन 100 मेगावाट (100MW) का फ्लोटिंग सोलर पावर प्लांट अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है। तय समय-सीमा के अनुसार पहले चरण में 50 मेगावाट क्षमता का प्लांट 31 मार्च तक चालू हो जाएगा, जबकि दूसरा चरण 30 जून तक पूरा कर लिया जाएगा।

यह परियोजना झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड (JBVNL) और Solar Energy Corporation of India (SECI) के बीच हुए समझौते का परिणाम है। करीब 800 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे इस फ्लोटिंग सोलर प्रोजेक्ट का निर्माण कार्य देश की प्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी Larsen & Toubro (L&T) को सौंपा गया है।

क्या है फ्लोटिंग सोलर प्लांट और क्यों है खास? फ्लोटिंग सोलर प्लांट वह प्रणाली है, जिसमें सोलर पैनल जलाशयों की सतह पर तैरते हुए लगाए जाते हैं। इससे जमीन की आवश्यकता नहीं होती और पानी के वाष्पीकरण में भी कमी आती है। गेतलसूद डैम पर बन रहा यह प्लांट झारखंड का पहला बड़े पैमाने का फ्लोटिंग सोलर प्रोजेक्ट होगा।

विशेषज्ञों के अनुसार जलाशय की सतह ठंडी रहने से सोलर पैनलों की दक्षता 10–15% तक बढ़ सकती है। भूमि अधिग्रहण की समस्या खत्म होती है । पर्यावरणीय प्रभाव अपेक्षाकृत कम होता है।

2018 से शुरू हुई थी प्रक्रियाः इस महत्वाकांक्षी परियोजना की नींव वर्ष 2018 में रखी गई थी, जब JBVNL और SECI के बीच औपचारिक समझौता हुआ। विश्व बैंक की सहायता से इस परियोजना को वित्तीय समर्थन मिला, जिससे इसे गति मिली।

झारखंड की ऊर्जा नीति में बड़ा बदलावः झारखंड अब तक कोयला आधारित ऊर्जा पर निर्भर रहा है, लेकिन यह परियोजना राज्य को हरित ऊर्जा की दिशा में तेजी से आगे बढ़ाएगी। इससे 100 मेगावाट उत्पादन से हजारों घरों को स्वच्छ बिजली मिलेगी। कार्बन उत्सर्जन में उल्लेखनीय कमी आएगी। राज्य की बिजली लागत में दीर्घकालिक गिरावट संभव है ।

आर्थिक और सामाजिक असरः इस प्रोजेक्ट से न केवल बिजली उत्पादन बढ़ेगा, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे। साथ ही, रांची और आसपास के क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति की गुणवत्ता बेहतर होगी।

क्या यह मॉडल बनेगा भविष्य का रास्ता? देश में जलाशयों की बड़ी संख्या को देखते हुए फ्लोटिंग सोलर प्लांट भविष्य में ऊर्जा उत्पादन का प्रमुख माध्यम बन सकते हैं। गेतलसूद परियोजना की सफलता झारखंड ही नहीं, बल्कि पूरे भारत के लिए एक मॉडल साबित हो सकती है।

गेतलसूद डैम पर बन रहा यह 100 मेगावाट फ्लोटिंग सोलर प्लांट झारखंड के ऊर्जा क्षेत्र में एक ऐतिहासिक कदम है। यदि तय समय पर दोनों चरण पूरे होते हैं, तो यह परियोजना राज्य को हरित ऊर्जा के क्षेत्र में नई ऊंचाई पर पहुंचा सकती है।

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वरिष्ठ पत्रकार मुकेश भारतीय पिछले तीन दशक से राजनीति, अर्थ, अधिकार, प्रशासन, पर्यावरण, पर्यटन, धरोहर, खेल, मीडिया, कला, संस्कृति, मनोरंजन, रोजगार, सरकार आदि को लेकर स्थानीय, राष्ट्रीय एवं वैश्विक स्तर पर बतौर कंटेंट राइटर-एडिटर सक्रिय हैं।
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