फर्जी डीड से 20 करोड़ का रिंग रोड मुआवजा घोटाला, 10 साल बाद ACB की बड़ी कार्रवाई

रांची दर्पण डेस्क। धनबाद रिंग रोड जमीन अधिग्रहण और मुआवजा वितरण में हुए बहुचर्चित घोटाले ने आखिरकार कानून का दरवाजा खटखटा ही लिया। फर्जी डीड के सहारे 20 करोड़ रुपये से अधिक का मुआवजा हड़पने वाले इस संगठित गिरोह पर भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने लगभग एक दशक बाद निर्णायक कार्रवाई करते हुए 17 लोगों को गिरफ्तार किया है। इस कार्रवाई ने अंचल कार्यालय से लेकर दलालों और भू-माफिया के गठजोड़ की परतें खोल दी हैं।
बताया जाता है कि वर्ष 2015 में तत्कालीन मुख्यमंत्री रघुवर दास ने इस मामले की जांच का आदेश दिया था। इसके एक साल बाद ACB ने दो एफआईआर दर्ज की थीं, लेकिन ठोस कार्रवाई के लिए वर्षों का इंतजार करना पड़ा। हेमंत सोरेन सरकार के कार्यकाल में नौ साल बाद ACB ने एक साथ कई ठिकानों पर छापेमारी कर इस घोटाले में शामिल लोगों को दबोच लिया।
जांच में सामने आया है कि रिंग रोड निर्माण के लिए अधिग्रहीत 117 डिसमिल जमीन के बदले फर्जी दस्तावेजों के आधार पर मुआवजा उठाया गया। धनबाद मौजा की अंचल भूमि और उसकी डीड संख्या का गलत इस्तेमाल कर फर्जी डीड तैयार किए गए। एक ही डीड संख्या पर दो अलग-अलग स्थानों की जमीन दर्शाई गई, वह भी वर्ष 1970 के पुराने दस्तावेजों के सहारे।
डीड संख्या 2683/1970 के मामले में मंटू महतो ने एक ही डीड से अलग-अलग जमीन दिखाकर करीब 90 लाख रुपये से अधिक का मुआवजा उठा लिया। इसी तरह डीड संख्या 25560 पर खाता संख्या 121, प्लॉट नंबर 1630 की मात्र तीन डिसमिल जमीन के बदले छह करोड़ रुपये से ज्यादा का भुगतान किया गया। बाद में यही डीड संख्या किसी अन्य व्यक्ति के नाम पर दूसरी जगह की जमीन के लिए इस्तेमाल की गई।
इस घोटाले में धनबाद के रिटायर्ड जिला भू-अर्जन पदाधिकारी उदयकांत पाठक को मुख्य अभियुक्त माना जा रहा है। ACB की टीम ने देवघर के नंदन पहाड़ स्थित उनके आवास पर अहले सुबह छापेमारी की। करीब तीन घंटे चली तलाशी के दौरान जब वह सामने नहीं आए, तो बंद कमरों के ताले तोड़े गए, जहां एक कमरे में छिपे उदयकांत पाठक को गिरफ्तार कर लिया गया।
सूत्रों के अनुसार, ACB को उदयकांत पाठक के नाम और बेनामी तौर पर देवघर के नंदन पहाड़, पोखना टिल्हा, खिजुरिया और बेलाबगान इलाके में संपत्तियों की जानकारी मिली है। इन संपत्तियों की जांच अब तेज कर दी गई है।
ACB अधिकारियों के अनुसार छापेमारी से पहले आरोपियों की पूरी सूची और ठिकानों की गहन जांच की गई थी। यही कारण रहा कि किसी को भी फरार होने का मौका नहीं मिला। जिन स्थानों पर छापेमारी हुई, वहां महिला पुलिस बल और वरिष्ठ अधिकारी भी तैनात थे, ताकि किसी तरह की आपत्ति या अव्यवस्था न हो।
गिरफ्तार सभी आरोपियों को मेडिकल जांच के लिए सदर अस्पताल ले जाया गया। इस दौरान मीडिया के सामने आते ही महिला आरोपी चेहरा छिपाती नजर आईं, जबकि सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे।
धनबाद रिंग रोड जमीन मुआवजा घोटाले को उजागर करने में सामाजिक और राजनीतिक कार्यकर्ता रमेश राही की अहम भूमिका रही। उन्होंने सूचना के अधिकार के तहत हजारों पन्नों की फाइलें जुटाईं और जिला प्रशासन से लेकर मुख्यमंत्री तक को सबूतों के साथ शिकायतें सौंपीं।
रमेश राही का कहना है कि यह भ्रष्टाचार के खिलाफ लंबी और कठिन लड़ाई थी। आदिवासियों और गरीबों के हक का पैसा लूटने वाले अफसरों और दलालों का गठजोड़ अब कानून के शिकंजे में है। उन्हें उम्मीद है कि इस कार्रवाई से पीड़ितों को न्याय मिलेगा और भविष्य में ऐसे घोटालों पर रोक लगेगी।
धनबाद रिंग रोड जमीन मुआवजा घोटाले में हुई यह कार्रवाई न सिर्फ भ्रष्टाचार के खिलाफ एक मजबूत संदेश है, बल्कि यह भी साबित करती है कि देर से ही सही, कानून आखिरकार अपना रास्ता बना ही लेता है।










