पत्रकारिता पर 25 महान चिंतकों के अनमोल विचार

राज़नामा.कॉम डेस्क। हमारे आसपास हो या छोटे-बड़े शहरों में, अलग-अलग राज्यों में या फिर देशो-दुनिया में क्या हो रहा हैं, इसकी जानकरी हमें पत्रकारिता के कारण ही मिलती हैं. हम पत्रकारिता के कारण ही देशो-दुनिया की छोटी-बड़ी ख़बरों से, घटनाओं से परिचित रहते हैं.

पत्रकारिता मतलब समाज के मुद्दों को उठाना, जनता की आवाज बनकर उनके हकों के लिए सरकार से लड़ना, भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाना, सरकारों की गलत नीतियों को जनता के सामने लाना और सच क्या हैं यह जनता को बताना यह हैं.

वास्तविक में देखा जाए तो पत्रकारिता एक ऐसी शक्ति हैं, जो किसी भी सत्ता को हिला कर रख सकती हैं. लेकिन अगर यही पत्रकारिता जिम्मेदारियों के साथ नहीं की जाए तो जनता, समाज और सरकार के लिए हानिकारक भी साबित हो सकती हैं.

लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कही जाने वाली इसी पत्रकारिता पर दुनिया के कई महापुरुषों ने अपने अनमोल विचार रखे हैं. और ये अनमोल विचार नए पत्रकारों के लिए काफी प्रेरणादायक भी साबित होते हैं. इस लेख में हमने महापुरुषों द्वारा कहे गए पत्रकारिता पर 25 अनमोल विचार रखे हैं….

  1. हम पत्रकारिता में लोकप्रिय होने के लिए नहीं आते. यह हमारा कर्तव्य होता है कि, हम सच्चाई की तलाश करें और जब तक जवाब नहीं मिले तब तक अपने नेताओं पर लगातार दबाव डालें. – हेलन थॉमस
  2. पत्रकारिता का कार्य है, जनहित में महत्वपूर्ण नई जानकारी को उजागर करना और उस जानकारी को एक संदर्भ में रखना है. ताकि हम उस जानकारी का उपयोग मानव की स्थिति को सुधारने में कर सकें. – जोशुआ ओपनहाइमर
  3. पत्रकारिता का एकमात्र उद्देश्य सेवा होना चाहिए. अख़बारी प्रेस एक महान शक्ति है, लेकिन जिस तरह पानी का अनियंत्रित प्रवाह पूरे देश को जलमग्न कर देता है. और फसलों को तबाह कर देता है, ठीक उसी तरह एक अनियंत्रित कलम भी सेवा के बजाए तबाह करने का कार्य करता है. – महात्मा गाँधी
  4. लोकतंत्र की सफलता या विफलता उसके पत्रकारिता पर आधारित रहता हैं. – स्कॉट पेली
  5. मैं पत्रकार बना ताकि, दुनिया के दिल के अधिक करीब रहू. – हेनरी ल्यूस
  6. प्रेस आधुनिक जीवन के महत्वपूर्ण अंगों में से एक है, खासकर लोकतंत्र में. प्रेस के पास जबरदस्त शक्तियां और जिम्मेदारियां हैं. प्रेस का सम्मान किया जाना चाहिए और उसका सहयोग भी. – पंडित जवाहरलाल नेहरु
  7. पत्रकारिता का संबंध घटनाओं से है, भावनाओं की काव्य से हैं. पत्रकारिता का संबंध संसार की दृष्टि से है, यह दुनिया को महसूस करने वाली कविता हैं. – आर्कीबाल्ड मैकलेश
  8. पत्रकारिता आपकी जान ले सकती हैं, लेकिन जब तक आप इसमें हैं, तब तक यह आपको जीवित रखेगी. – होरेस ग्रीले
  9. प्रकाशन एक व्यवसाय है, लेकिन पत्रकारिता कभी व्यवसाय नहीं थी और आज भी नहीं है. और न ही यह कोई पेशा हैं. – हेनरी ल्यूस
  10. पत्रकारिता, लोकतंत्र को बनाए रखती है. यह प्रगतिशील सामाजिक परिवर्तन के लिए ताकत है. – एंड्रयू वॉक्स
  11. पत्रकारिता का क्षेत्र सेवा का क्षेत्र है, इसमें पहले सेवा और बाद में मेवा की अभिलाषा रखनी चाहिए. – बाबूराव विष्णु पराड़कर, संपादक 
  12. हमें अशिक्षितों की राय देकर, पत्रकारिता हमें समुदाय की अज्ञानता से जोड़े रखती है. – ऑस्कर वाइल्ड
  13. और मेरा मानना है कि, अच्छी पत्रकारिता, अच्छा टेलीविजन हमारी दुनिया को एक बेहतर जगह बना सकता है. -क्रिस्टियन अमनपुर
  14. पत्रकारिता कोई पेशा नहीं है, यह जनसेवा का माध्यम है, लोकतांत्रिक परंपराओं की रक्षा करने, शांति और भाईचारे की भावना बढाने में इसकी भूमिका है. – डॉ. शंकर दयाल शर्मा, पूर्व राष्ट्रपति
  15. पत्रकारिता को मैं रणभूमि से भी बढ़ी चीज मानता हूँ, यह कोई पेशा नहीं, बल्कि पेशे से भी कोई उंची चीज हैं. – जेम्स मैक्डोवाल
  16. समाज और समाज से पहले ज्ञान और विविध प्रकार की जानकारियां रखकर समाज को शिक्षित करने और मार्ग-निर्देशन की शैली ही पत्रकारिता हैं. जिसमें तटस्थता, स्पष्टता और मूल्यों के प्रति आस्था समाहित रहती हैं. – विजय कुलश्रेष्ठ, लेखक
  17. लोकतंत्र में पत्रकारिता जनता को शिक्षित करने और अभी भी हमारे प्राचीन आदर्शों के प्रति सक्रीय बनाने वाली ताकत हैं. -डोरिस कर्न्स गुडविन
  18. पत्रकारिता विज्ञान की तरह होनी चाहिए. जहाँ तक संभव हो, तथ्यों का सत्यापन किया जाना चाहिए. यदि पत्रकार अपने पेशे के लिए दीर्घकालिक विश्वसनीयता चाहते हैं, तो उन्हें उस दिशा में जाना चाहिए. -जूलियन असांजे
  19. पत्रकारिता एक रचनाशील शैली हैं. इसके बगैर समाज को बदलना असंभव हैं. अत: पत्रकारों को अपने दायित्व और कर्तव्य का निरवाह निष्ठापूर्वक करना चाहिए. क्योंकि उन्हीं के पैरों के छालों से इतिहास लिखा जाएगा. – महादेवी वर्मा
  20. एक पत्रकार की पहली निष्ठा जनता के प्रति होनी चाहिए. और स्वतंत्र रहना चाहिए. किसी भी प्रकार के व्यक्तिगत, दलों, संगठनों के दबाव में नहीं आना चाहिए. बल्कि सच्चाई को उजागर करना चाहिए. – डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम, पूर्व राष्ट्रपति
  21. मेरा इकलौता सुझाव यह है कि, अपने सपने का अनुसरण करें और वहीं करें जो आपको सबसे अच्छा लगता हो. मैंने पत्रकारिता इसलिए चुना, क्योंकि मैं ऐसी जगहों पर होना चाहता था जहां इतिहास गढ़े जाते हों. -जॉर्ज रैमोस
  22. मेरा अब भी मानना है कि, यदि आपका लक्ष्य दुनिया बदलना है तो, पत्रकारिता इसके लिए एक फौरी अल्पकालीन औजार है. – टॉप स्टोपर्ड
  23. पौराणिक युग में जो स्थान और महत्व नारद मुनि को था, वहीं स्थान आज समाचार पत्र(पत्रकारिता) का हैं. उस समय नारद आकश-पाताल की खबरे देवताओं को दिया करते थे. आज वहीं काम समाचार पत्र लोगों के बीच करते हैं. – डॉ सुशीला जोशी
  24. समाचार बोध वह बोध हैं, जिससे पता चलता है कि क्या जरुरी हैं, क्या महत्वपूर्ण हैं, किस बात में लोग रूचि रखते हैं और यही पत्रकारिता हैं. – बर्टन रस्कोय
  25. मेरे शब्द कलम-स्याही से नहीं, आत्मा की आग-पानी से भलखे जाते हैं. – श्रीराम शर्मा आचर्य, संस्थापक अखंड ज्योति

 

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