
कांके (रांची दर्पण)। केंद्रीय मनोरोग संस्थान (CIP) कांके में कार्यरत सफाईकर्मी बिरसा कच्छप की दर्दनाक मौत के बाद सोमवार को कांके इलाके में आक्रोश फूट पड़ा। आक्रोशित ग्रामीणों और परिजनों ने मृतक का शव सीआईपी के मुख्य गेट पर रखकर धरना-प्रदर्शन किया और संस्थान का मुख्य द्वार बंद कर दिया। प्रदर्शन सुबह करीब 10 बजे शुरू हुआ, जो शाम लगभग छह बजे तक चला।
धरना में मृतक के परिजन, ग्रामीणों के साथ-साथ विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता और सामाजिक कार्यकर्ता बड़ी संख्या में शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने मृतक के परिवार को 50 लाख रुपये मुआवजा, परिवार के एक सदस्य को सीआईपी में स्थायी नौकरी, न्यायिक जांच तथा दोषियों की गिरफ्तारी की मांग की।
रविवार को हुआ था हादसा
जानकारी के अनुसार, रविवार को सीआईपी परिसर में सफाईकर्मियों से पेड़ काटने का काम कराया जा रहा था। इसी दौरान पेड़ की एक बड़ी डाली अचानक टूटकर बिरसा कच्छप के सीने पर गिर गई, जिससे मौके पर ही उनकी मौत हो गई। बताया जाता है कि मृतक की पत्नी का पहले ही निधन हो चुका है और अब उनकी नौ वर्षीय बेटी त्रिशा कच्छप अनाथ हो गई है। इस घटना ने सभी को झकझोर कर रख दिया।
नेताओं ने संभाली मोर्चा
धरना-प्रदर्शन को कांके विधायक सुरेश बैठा, भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा के प्रदेश उपाध्यक्ष कमलेश राम, लोकहित अधिकार पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष हरिनाथ साहू, निशा भगत, जेएलकेएम के फूलेश्वर बैठा, देवेंद्र महतो, जिला परिषद सदस्य किरण देवी, सोमा उरांव सहित कई नेताओं और जनप्रतिनिधियों का समर्थन मिला।
विधायक सुरेश बैठा और भाजपा नेता कमलेश राम ने ग्रामीणों की ओर से सीआईपी के प्रशासकीय पदाधिकारी डॉ. सुनील सूर्यवंशी से वार्ता की।
वार्ता के बाद हुआ समझौता
लंबी बातचीत के बाद संस्थान प्रबंधन और आउटसोर्सिंग कंपनी मेसर्स धनंजय कुमार, पटना के साथ समझौता हुआ। समझौते के तहत मृतक के परिवार को 10 लाख रुपये मुआवजा देने पर सहमति बनी, जिसमें से 2 लाख रुपये तत्काल और शेष राशि तीन दिनों के भीतर देने की घोषणा की गई।
इसके अलावा मृतक की बहन को आउटसोर्सिंग कंपनी में नौकरी देने, अनाथ बच्ची त्रिशा कच्छप की शिक्षा की जिम्मेदारी उठाने और आउटसोर्सिंग कंपनी पर किसी तरह की कार्रवाई नहीं करने संबंधी घोषणा पत्र संस्थान की ओर से जारी किया गया।
प्राथमिकी दर्ज, धरना समाप्त
इस मामले में मृतक के भाई प्रदीप कच्छप ने संबंधित थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई है। समझौता होने के बाद शाम करीब छह बजे धरना समाप्त हुआ और परिजन शव को अंतिम संस्कार के लिए ले गए।
बहरहाल इस घटना ने एक बार फिर आउटसोर्सिंग कर्मचारियों की सुरक्षा, कार्यस्थल पर सावधानी और जवाबदेही के सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते सुरक्षा उपाय किए गए होते, तो एक मासूम बच्ची को अनाथ होने से बचाया जा सकता था।
समाचार स्रोत : रांची दर्पण डेस्क के लिए मुकेश भारतीय / मीडिया रिपोर्ट्स





