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अब विश्वविद्यालयों में नहीं दबेगी छात्रों की आवाज़, बनेगा मजबूत शिकायत निवारण तंत्र

सरकारी विवि व कॉलेजों में बनेगी अलग-अलग शिकायत निवारण समितियां, छात्रों और शिक्षकों को मिलेगा न्याय का मजबूत मंच

रांची दर्पण डेस्क। झारखंड राज्य के सरकारी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में पढ़ने-पढ़ाने वाले हजारों छात्रों और शिक्षकों के लिए (शिकायत निवारण तंत्र) राहत की बड़ी खबर है। उच्च व तकनीकी शिक्षा विभाग ने शिकायतों के त्वरित और पारदर्शी समाधान के लिए ग्रिवांस रिडरेशल मैकेनिज्म लागू करने की दिशा में अहम कदम बढ़ाया है। विभाग ने इससे संबंधित विस्तृत ड्राफ्ट तैयार कर राज्य के सभी सरकारी विश्वविद्यालयों को भेज दिया है। अब विश्वविद्यालय अपने-अपने सिंडिकेट से स्वीकृति लेकर इसे अंतिम रूप में विभाग को भेजेंगे।

ड्राफ्ट के मुताबिक, अब विश्वविद्यालय और कॉलेज स्तर पर अलग-अलग शिकायत निवारण समितियां गठित की जाएंगी। इन समितियों के माध्यम से छात्र और शिक्षक अपनी समस्याओं को औपचारिक रूप से दर्ज करा सकेंगे और तय समयसीमा में समाधान की उम्मीद कर सकेंगे। यह व्यवस्था राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की भावना के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और न्यायपूर्ण शैक्षणिक वातावरण सुनिश्चित करने की दिशा में एक ठोस प्रयास मानी जा रही है।

किन मामलों में कर सकेंगे शिकायत

नई व्यवस्था के तहत छात्र कॉलेज या विश्वविद्यालय के प्रोस्पेक्टस में दर्ज सुविधाएं उपलब्ध नहीं होने, भेदभाव, शैक्षणिक गुणवत्ता में कमी, छात्र उत्पीड़न, छात्र संघ चुनाव से जुड़ी अनियमितताओं, नियमों की अनदेखी और नामांकन प्रक्रिया में गड़बड़ी जैसी शिकायतें दर्ज करा सकेंगे। इससे छात्रों को प्रशासनिक स्तर पर अपनी बात रखने का एक सशक्त मंच मिलेगा।

कॉलेज स्तर पर समिति की संरचना

कॉलेज स्तर पर गठित शिकायत निवारण समिति में प्राचार्य या प्रोफेसर-इन-चार्ज अध्यक्ष होंगे। कुलपति द्वारा नामित एक विभागाध्यक्ष या वरीय प्राध्यापक, प्राचार्य द्वारा नामित दो वरीय शिक्षक सदस्य होंगे। वहीं, प्राचार्य द्वारा नामित एनएसएस प्रोग्राम ऑफिसर सदस्य सचिव की भूमिका निभाएंगे। इसके अलावा एक छात्र प्रतिनिधि को आमंत्रित सदस्य के रूप में समिति में शामिल किया जाएगा।

विश्वविद्यालय स्तर पर भी बनेगी सशक्त समिति

विश्वविद्यालय स्तर पर गठित समिति में डीएसडब्ल्यू (डायरेक्टर स्टूडेंट अफेयर्स) अध्यक्ष होंगे। प्रॉक्टर, कुलपति द्वारा नामित पांच प्रोफेसर, फाइनल ईयर के दो छात्र सदस्य होंगे, जबकि रजिस्ट्रार सदस्य सचिव की जिम्मेदारी निभाएंगे। समिति में अध्यक्ष द्वारा नामित अन्य सदस्यों को भी शामिल किया जा सकेगा। खास बात यह है कि समिति में एसटी/एससी/ओबीसी वर्ग से कम से कम एक सदस्य रखना अनिवार्य होगा।

शिक्षकों और कर्मचारियों के लिए अलग व्यवस्था

शिक्षकों और कर्मचारियों की शिकायतों के निवारण के लिए बनाई जाने वाली समिति की अध्यक्षता सेवानिवृत्त न्यायाधीश करेंगे। समिति में एक डीन, सिंडिकेट का एक सदस्य, चांसलर नॉमिनी, रजिस्ट्रार, एससी/एसटी वर्ग से एक शिक्षक, वित्त सेवा और प्रशासनिक सेवा से सेवानिवृत्त अधिकारी सदस्य होंगे। प्रॉक्टर इसके सदस्य सचिव होंगे। अध्यक्ष को आवश्यकतानुसार अन्य सदस्यों को आमंत्रित करने का अधिकार भी होगा।

एक साल का होगा कार्यकाल

ड्राफ्ट के अनुसार सभी समितियों के सदस्यों का कार्यकाल एक वर्ष का होगा, ताकि व्यवस्था में नियमित समीक्षा और जवाबदेही बनी रहे।

शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता की ओर कदम

विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल न केवल छात्रों और शिक्षकों को न्याय दिलाने में मददगार होगी, बल्कि उच्च शिक्षा संस्थानों में पारदर्शिता, भरोसे और गुणवत्ता को भी मजबूती देगी। यदि इसे सही तरीके से लागू किया गया, तो यह झारखंड की उच्च शिक्षा व्यवस्था के लिए एक मील का पत्थर साबित हो सकता है।

स्रोत : रांची दर्पण डेस्क के लिए मुकेश भारतीय / मीडिया रिपोर्ट्स

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