
रांची दर्पण संवाददाता। झारखंड की राजधानी रांची में आज एक ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व के अवसर पर मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन और उनकी पत्नी विधायक कल्पना सोरेन ने झारखंड विधान सभा में महाधिवक्ता राजीव रंजन द्वारा लिखित पुस्तक ‘बाबा बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग देवघर: A Touch of the Divine (दिव्यता का स्पर्श)’ का विधिवत लोकार्पण किया। इस अवसर पर उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों ने इस पुस्तक को झारखंड की सांस्कृतिक धरोहर और धार्मिक आस्था को समृद्ध करने वाला एक महत्वपूर्ण दस्तावेज बताया।
पुस्तक ‘बाबा बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग देवघर’ में झारखंड के प्रसिद्ध बाबा बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग की ऐतिहासिकता, प्राचीनता, पौराणिकता, धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक मूल्यों और वैधानिक तत्वों का गहन विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है।
यह पुस्तक न केवल धार्मिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह झारखंड की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को समझने के लिए एक अनमोल संसाधन है। लेखक राजीव रंजन झारखंड के महाधिवक्ता हैं। उन्हों ने इस पुस्तक में बाबा बैद्यनाथ धाम की महत्ता को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करने का प्रयास किया है।
मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने लोकार्पण समारोह में अपने संबोधन में कहा कि यह पुस्तक बाबा बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग के प्रति हमारी आस्था और झारखंड की सांस्कृतिक धरोहर को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का एक अनूठा प्रयास है। राजीव रंजन जी ने अपने लेखन के माध्यम से हमारी प्राचीन परंपराओं और आध्यात्मिक मूल्यों को जीवंत किया है।
इस लोकार्पण समारोह में मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव अविनाश कुमार, सचिव अरवा राजकमल, मुख्यमंत्री के वरीय आप्त सचिव सुनील श्रीवास्तव, अपर महाधिवक्ता अच्युत केशव, और राजकीय अधिवक्ता मनोज कुमार सहित कई वरिष्ठ अधिकारी और गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। समारोह का आयोजन झारखंड विधान सभा के सभागार में किया गया, जहां गरिमामय वातावरण में इस पुस्तक का अनावरण हुआ।
बता दें कि झारखंड के देवघर में स्थित बाबा बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग भारत के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है और इसे देश भर के श्रद्धालुओं के लिए एक प्रमुख तीर्थस्थल माना जाता है। इस पुस्तक में न केवल इस तीर्थस्थल की धार्मिक महत्ता को रेखांकित किया गया है, बल्कि इसके ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहलुओं को भी विस्तार से उजागर किया गया है।
महाधिवक्ता राजीव रंजन ने इस पुस्तक के माध्यम से बाबा बैद्यनाथ धाम की महत्ता को वैश्विक स्तर पर ले जाने का प्रयास किया है। उनके लेखन में गहन शोध, ऐतिहासिक तथ्यों और धार्मिक आस्था का सुंदर समन्वय देखने को मिलता है। इस पुस्तक के अंग्रेजी शीर्षक ‘A Touch of the Divine’ से यह स्पष्ट होता है कि लेखक ने इसे वैश्विक पाठकों के लिए भी सुलभ बनाने का प्रयास किया है।