निर्णायक मोड़ पर रिम्स नियुक्ति घोटाला, सात दिन में जमा करना है आवासीय

झारखंड में हेमंत सरकार के गठन के बाद विधायक बंधु तिर्की और टीएसी के सदस्यों ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मिलकर उन्हें नियुक्तियों में हुई गड़बड़ियों की जानकारी दी थी…”

रांची दर्पण डेस्क / नारायण विश्वकर्मा । रिम्स में नियुक्ति घोटाले की खबरें सुर्खियां बनती रही हैं, क्योंकि रिम्स में नियुक्तियों का विवादों से पुराना नाता है। पिछले साल हुए थर्ड-फोर्थ ग्रेड में करीब 200 लोगों के नियुक्ति घोटाले के मामले में अब एक दिलचस्प मोड़ आ गया है।expert media news network
31 जुलाई को रिम्स की प्रभारी निदेशक मंजू गाड़ी के हस्ताक्षर से एक कार्यालय आदेश निकाला गया है। कार्यालय आदेश के अनुसार 8 मार्च 2019 को निकले विज्ञापन संख्या 955ए और 955बी के आलोक में नवनियुक्त में सभी कर्मियों को पत्र निर्गत की तिथि से 7 दिनों के अंदर स्थायी आवासीय प्रमाण पत्र रिम्स कार्यालय में जमा करने को कहा गया है।
सांसत में हैं बहाल हुए कई बाहरी उम्मीदवारः रिम्स में नियुक्त कर्मियों से आवासीय प्रमाण पत्र मांगे जाने की खबर से वैसे नियुक्त कर्मियों में हड़कंप है, जिसने फर्जी आवासीय प्रमाण पत्र के आधार पर नौकरी हासिल की है जो, झारखंड के निवासी नहीं हैं।
इसके अलावा कुछ ऐसे भी नियुक्त कर्मी भी हैं, जिसने सेटिंग के तहत बहाली से पूर्व आवासीय प्रमाण पत्र जमा ही नहीं किया है।
 अनुमान है कि 30 से अधिक लोगों के आवासीय प्रमाण पत्र जाली हो सकते हैं। बहाल हुए नियुक्त कर्मियों के आवासीय प्रमाण पत्र की जांच के बाद ही सही संख्या का पता चल पाएगा।
बता दें कि पूर्व स्वास्थ्य मंत्री रामचंद्र चंद्रवंशी को नियुक्ति घोटाले की सूचना मिलने के बाद उन्होंने ऐसे नियुक्त कर्मचारियों से बांड भरवाने का निर्देश दिया था।
ऐसे संदेहास्पद नियुक्त कर्मियों से बांड लिखवाया गया था कि दो साल के अंदर अगर इनकी नियुक्ति की जांच हुई और गड़बड़ी पायी गयी तो, ऐसे लोगों की नियुक्ति रद्द कर दी जायेगी। आफिसियल फाइल में इसे अंकित भी किया गया है।
पूनम मेरिट लिस्ट में टॉप पर थी, पर बाहरी को रखा गयाः सूत्र बताते हैं कि बाहरी नियुक्त कर्मियों में बिहार, यूपी, गुजरात, महाराष्ट्र के हैं। वहीं स्थानीय और रिम्स में कार्यरत कर्मियों का नाम मेरिट लिस्ट में होने के बावजूद पीक एंड चूज के फार्मूले के तहत पैरवीवाले लोगों को बहाल कर लिया गया।
मिली जानकारी के अनुसार रिम्स में 13 साल से दैनिक वेतनभोगी के रूप में कार्यरत श्रीमती पूनम तिग्गा की नियुक्ति रद्द कर दी गई है। स्क्रूटनी के समय मेरिट लिस्ट में उसका नाम सबसे ऊपर था।
पूनम ने दैनिक वेतनभोगी के रूप में 2007 से लेकर 2010 (तीन साल) तक एमआरडी में कम्प्यूटर ऑपरेटर के पद पर काम किया। अभी वह नर्सिंग कॉलेज में कम्प्यूटर ऑपरेटर के पद पर कार्यरत है।
एमआरडी में बाहरी की बहाली का आरोपः सूत्र बताते हैं कि मेडिकल रिकार्ड विभाग (एमआरडी) में कार्यरत दो कर्मचारी अहर्ता पूरी नहीं करने के बावजूद पैरवी के बल पर नियुक्त कर लिये गये।
एमआरडी में नियुक्त किये गये मनींद्र कुमार पटेल झारखंड राज्य के नहीं हैं। वे वाराणसी के निवासी बताये जाते हैं। इसके अलावा फेलिक्स एरिक्शन एक्का झारखंडी तो हैं, लेकिन निर्धारित मानदंड के आधार पर दोनों के अनुभव प्रमाण पत्र शक के दायरे में है। नियमतः तीन साल का अनुभव होना चाहिए।
रिंकी के बदले बाहरी, श्वेता की बहाली का आरोपः इसी तरह दैनिक वेतनभोगी के रूप में कार्यरत कम्प्यूटर ऑपरेटर रिंकी कुमारी का मामला सामने आया है।
रिंकी कुमारी रिसेप्सनिस्ट की उम्मीदवार थी। मेरिट लिस्ट में इनका नाम क्रमांक 12 पर अंकित था। रिम्स में कुल तीन रिसेप्सनिस्ट के तीन पद पर नियुक्ति होनी थी। लेकिन रिम्स में कार्यरत रिंकी कुमारी के स्थान पर झारखंड से बाहर की रहनेवाली श्वेता आर्या को रिसेप्सनिस्ट बना दिया गया।
श्वेता आर्या पूर्व स्वास्थ्य मंत्री रामचंद्र चंद्रवंशी के पीए सतेन्द्र सिंह की बेटी है। रिंकी कुमारी स्थानीय होने के बावजूद छंट गयी और श्वेता आर्या बाहरी होते हुए भी नियुक्त कर ली गयीं।
रिंकी कुमारी दैनिक वेतनभोगी के रूप में 2012 से कम्प्यूटर ऑपरेटर के पद पर कार्यरत है। 2013 से रिम्स के डिप्टी सुपरिटेंडेंट के ऑफिस में अभी वह काम कर रही है।
कई लोग हाईकोर्ट गएः बताया गया कि इसी तरह से 2008 से रिम्स में संविदा के रूप में आर्टिस्ट के पद पर कार्यरत अवधेश राम के बदले महाराष्ट्र के रहनेवाले सुभाष पंजाबरोव टायडे को नियुक्त कर लिया गया है।
बताते चलें कि नियुक्ति पैनल में हुई गड़बड़ी को लेकर कई लोगों ने झारखंड हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। इनमें खालिद अख्तर और अनिल कुमार मुख्य रूप से शामिल हैं। कोरोना के मद्देनजर अभी इस पर सुनवाई शुरू नहीं हुई है।
जांच रिपोर्ट में गड़बड़ी का खुलासाः स्वास्थ्य विभाग के विशेष सचिव चंद्रशेखर उरांव की अध्यक्षता में बनी कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में नियुक्ति घोटाले का खुलासा कर दिया है। जांच कमेटी को मिले शिकायत पत्र और रिम्स प्रबंधन की ओर से उपलब्ध कराये गये कागजात के आधार पर कमेटी ने माना है कि नियुक्ति में गड़बड़ी हुई है।
जांच कमेटी ने अपनी रिपोर्ट 6 जून को स्वास्थ्य विभाग को सौंप दी थी। नियुक्ति चयन समिति के सक्रिय सदस्य के रूप में एमआरडी के एचओडी एसबी सिंह, फारमॉक्लॉजी की एचओडी मंजू गाड़ी, जो अभी रिम्स निदेशक की प्रभार में हैं। इसके अलावा भी कई सीनियर डाक्टर भी शामिल थे।
रिम्सकर्मियों को प्राथमिकता नहीं दी गईः सरकार ने थर्ड-फोर्थ ग्रेड की नौकरियों में स्थानीय को शत-प्रतिशत आरक्षण देने का फैसला लिया था। नियुक्ति के लिए निकाले गये विज्ञापन में कहा गया था कि रिम्सकर्मियों को प्राथमिकता दी जायेगी।
रिम्स में 5 से 15 से साल से आउट सोर्सिंग, दैनिक वेतनभोगी और संविदा पर कार्यरत रिम्सकर्मियों के पास अहर्ता रहते हुए भी उन्हें नियुक्ति के काबिल नहीं समझा गया। ऐसे कर्मियों की रिम्स में संख्या 50 से अधिक है।
बहरहाल, नियुक्ति से पूर्व किस तरह से उम्मीदवारों के आवासीय प्रमाण पत्र की जांच हुई।  इस पर सवाल उठना लाजिमी है। जबकि रिम्स के पूर्व निदेशक दिनेश सिंह की ओर से कहा गया था कि रिम्स में सभी नियुक्तियां नियम के तहत हुई है।

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