
फिलहाल झारखंड क्रिकेट की निगाहें जेएससीए और पश्चिम सिंहभूम क्रिकेट संघ की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या इस मामले में पारदर्शी जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की जाती है या फिर यह विवाद भी अन्य मामलों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा…
रांची दर्पण डेस्क। झारखंड क्रिकेट में एक बार फिर चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता और नियमों के पालन को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। इस बार मामला पश्चिम सिंहभूम जिला टीम में कथित रूप से ‘बाहरी’ खिलाड़ियों को शामिल किए जाने और उनकी उम्र संबंधी दस्तावेजों में भारी विसंगति का है।
अंडर-19 अंतर-जिला प्रतियोगिता में बंगाल क्रिकेट लीग में लंबे समय से सक्रिय रहे दो खिलाड़ियों परमजीत सिंह और सचिन दुबे को उतारे जाने के बाद खेल जगत में विवाद गहरा गया है।
मामले की सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि दोनों खिलाड़ियों की वास्तविक उम्र और झारखंड क्रिकेट में प्रस्तुत की गई उम्र के बीच बड़ा अंतर सामने आया है। उपलब्ध प्रमाण-पत्रों के अनुसार दोनों खिलाड़ी पिछले कई वर्षों से पश्चिम बंगाल की प्रतिष्ठित क्रिकेट लीग और विश्वविद्यालय स्तर की प्रतियोगिताओं में नियमित रूप से खेलते रहे हैं। इसके बावजूद उन्हें झारखंड की अंडर-19 प्रतियोगिता में शामिल किया जाना कई सवाल खड़े करता है।
सूत्रों के अनुसार परमजीत सिंह पश्चिम बंगाल के पश्चिम बर्दवान जिले के निवासी हैं। उन्होंने सत्र 2024-25 और 2025-26 में तालातला इंस्टीट्यूट की ओर से क्रिकेट खेला है। इसके अलावा वे खिदिरपुर स्पोर्टिंग क्लब और इंडियन बॉयज एथलेटिक क्लब जैसे प्रतिष्ठित क्लबों का भी प्रतिनिधित्व कर चुके हैं।
पश्चिम बंगाल के दस्तावेजों में उनकी जन्मतिथि 23 अगस्त 2000 दर्ज है, जबकि झारखंड की ओर से उन्हें अंडर-19 प्रतियोगिता में खिलाने के लिए जन्मतिथि 06 अक्टूबर 2008 दर्शाई गई है। यह अंतर करीब आठ वर्षों का है, जो चयन प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है।
इसी तरह सचिन दुबे चितरंजन के फुलझरी क्षेत्र के निवासी बताए जा रहे हैं। वह बंगाल क्रिकेट के कई क्लबों तालातला इंस्टीट्यूट, बर्नपुर क्रिकेट क्लब, कुमारतुली इंस्टीट्यूट और बालक संघ की ओर से खेल चुके हैं।
बंगाल के रिकॉर्ड में उनकी जन्मतिथि 13 जनवरी 2001 दर्ज है, जबकि झारखंड के दस्तावेजों में इसे बदलकर 30 नवंबर 2007 कर दिया गया है। यह भी उम्र में लगभग छह वर्षों के अंतर का मामला है।
विवाद को और गहरा करने वाली बात यह है कि सचिन दुबे को न केवल जिला स्तर पर मौका दिया गया, बल्कि उन्हें जेएससीए की अंडर-19 जोनल टीम में भी शामिल कर लिया गया है। इससे चयन प्रक्रिया की निष्पक्षता पर खिलाड़ियों, अभिभावकों और खेल प्रेमियों के बीच असंतोष बढ़ता दिख रहा है।
इस पूरे मामले पर जेएससीए सचिव सौरभ तिवारी ने सफाई देते हुए कहा कि दूसरे राज्यों में भी प्रोफेशनल खिलाड़ियों को खेलने का अवसर दिया जाता है। कई राज्यों में अधिकतम दो पेशेवर खिलाड़ियों को टीम में शामिल करने का नियम है।
हालांकि उम्र संबंधी गंभीर आरोपों पर उन्होंने स्पष्ट जवाब देने से बचते हुए कहा कि इस विषय में पश्चिम सिंहभूम क्रिकेट संघ के सचिव से बात करने के बाद ही कुछ कहा जा सकेगा।
उधर, क्रिकेट हलकों में यह चर्चा तेज है कि यदि दस्तावेजों में उम्र परिवर्तन के आरोप सही पाए जाते हैं तो यह केवल चयन प्रक्रिया की त्रुटि नहीं, बल्कि एक गंभीर प्रशासनिक और नैतिक प्रश्न बन सकता है। अंडर-19 जैसी आयु-आधारित प्रतियोगिताओं में वरिष्ठ उम्र के खिलाड़ियों को शामिल करना युवा प्रतिभाओं के अवसरों पर सीधा प्रहार माना जा रहा है।
स्थानीय क्रिकेटरों और अभिभावकों का कहना है कि यदि इस तरह के मामलों की निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो झारखंड क्रिकेट की साख पर असर पड़ सकता है। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि चयन प्रक्रिया, आयु सत्यापन और राज्य प्रतिनिधित्व के नियमों की स्वतंत्र जांच कराना अब जरूरी हो गया है।










