ओरमांझी के अंकित ने यूजीसी नेट में रचा इतिहास, जनसंचार व पत्रकारिता में पीएचडी का रास्ता किया प्रशस्त

रांची दर्पण डेस्क। ओरमांझी प्रखंड के सिलदिरी ग्राम निवासी स्वर्गीय धनेश्वर पाहन के सुपुत्र अंकित कुमार पाहन ने अपनी मेहनत, जज़्बे और आत्मविश्वास के बल पर एक बड़ी शैक्षणिक उपलब्धि हासिल कर ली है। अंकित ने यूजीसी नेट दिसंबर 2025 परीक्षा में जनसंचार और पत्रकारिता विषय में सफलता प्राप्त करते हुए पीएचडी के लिए अपनी पात्रता सिद्ध की है। उन्होंने इस प्रतिष्ठित राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा में 138 अंक और 75.02 परसेंटाइल हासिल कर पूरे क्षेत्र का नाम रोशन किया है।

ग्रामीण परिवेश से निकलकर इस कठिन परीक्षा में सफलता प्राप्त करना आसान नहीं होता, लेकिन अंकित पाहन ने यह साबित कर दिया कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत सच्ची तो कोई भी बाधा रास्ता नहीं रोक सकती।

उनकी इस सफलता से न सिर्फ ओरमांझी प्रखंड बल्कि आसपास के क्षेत्रों में भी खुशी और गर्व का माहौल है। खासकर युवा छात्र-छात्राओं के लिए अंकित आज प्रेरणा का प्रतीक बनकर उभरे हैं।

अंकित पाहन की शैक्षणिक यात्रा भी काफी प्रभावशाली रही है। उन्होंने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी यूनिवर्सिटी से फिल्म मेकिंग में स्नातक की पढ़ाई पूरी की, जबकि रांची विश्वविद्यालय से फिल्म स्टडीज़ एवं प्रोडक्शन में एमए किया है। अब वे जनसंचार और पत्रकारिता के क्षेत्र में शोध करते हुए अकादमिक और रचनात्मक दोनों ही क्षेत्रों में योगदान देने की तैयारी में हैं।

इस सफलता के पीछे एक भावनात्मक और संघर्षपूर्ण कहानी भी जुड़ी है। अंकित के पिता, जो जिला कल्याण कार्यालय दुमका में क्लर्क के पद पर कार्यरत थे, लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे थे। 6 जनवरी 2026 को जब यूजीसी नेट की परीक्षा थी, उस समय उनके पिता अस्पताल में भर्ती थे। इसके बावजूद अंकित ने साहस दिखाया, माता-पिता के आशीर्वाद को संबल बनाया और परीक्षा में शामिल हुए।

दुर्भाग्यवश 9 जनवरी 2026 को इलाज के दौरान उनके पिता का निधन हो गया। इस कठिन समय में भी अंकित ने अपने लक्ष्य से ध्यान नहीं हटने दिया और आज उनकी मेहनत रंग लाई।

पढ़ाई के साथ-साथ अंकित एक स्वतंत्र स्टूडियो भी संचालित करते हैं, जहां वे फिल्म और ऑडियो-वीडियो प्रोडक्शन से जुड़ा कार्य करते हैं। हाल ही में बनी एक नागपुरी फीचर फिल्म सेरेंग का प्रदर्शन बेंगलुरु फिल्म फेस्टिवल में हुआ, जिसमें अंकित ने को-प्रोड्यूसर और लाइन प्रोड्यूसर की महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। यह उपलब्धि उनके रचनात्मक कौशल और पेशेवर प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

अंकित का मानना है कि जनसंचार, पत्रकारिता और फिल्म के क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं। सही मार्गदर्शन, कड़ी मेहनत और निरंतर सीखने की भावना से इस क्षेत्र में न केवल करियर बनाया जा सकता है, बल्कि समाज को भी नई दिशा दी जा सकती है। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता, परिवार, मित्रों और मार्गदर्शन करने वाले सभी शुभचिंतकों को दिया है।

अंकित पाहन की इस उपलब्धि पर शिक्षाविदों, बुद्धिजीवियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने उन्हें बधाई दी है और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है। ओरमांझी का यह होनहार बेटा आज साबित कर रहा है कि सपने चाहे गांव में जन्म लें, लेकिन उड़ान राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर तक भरी जा सकती है।

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वरिष्ठ पत्रकार मुकेश भारतीय पिछले तीन दशक से राजनीति, अर्थ, अधिकार, प्रशासन, पर्यावरण, पर्यटन, धरोहर, खेल, मीडिया, कला, संस्कृति, मनोरंजन, रोजगार, सरकार आदि को लेकर स्थानीय, राष्ट्रीय एवं वैश्विक स्तर पर बतौर कंटेंट राइटर-एडिटर सक्रिय हैं।
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