रांची दर्पण डेस्क। झारखंड की राजधानी रांची के सदर अस्पताल में हृदय रोगियों के लिए बड़ी राहत की खबर है। यहां कार्डियोथोरेसिक एंड वैस्कुलर सर्जरी (सीटीवीएस) कैथ लैब स्थापित करने की तैयारियां तेज़ हो गई हैं। अस्पताल प्रबंधन ने विप्रो-जीई कंपनी की अत्याधुनिक कैथ लैब मशीन को अंतिम रूप दे दिया है।
उम्मीद जताई जा रही है कि फरवरी के अंत तक ये मशीनें अस्पताल के चौथे फ्लोर पर स्थापित कर दी जाएंगी और इसके साथ ही दिल के मरीजों को जिले स्तर पर ही उन्नत इलाज की सुविधा मिलने लगेगी।
अस्पताल के चौथे तल पर स्थित दो कमरों को आपस में जोड़कर कैथ लैब विकसित की जाएगी। यह लैब 24 घंटे संचालित होगी और इसमें एडवांस रेडियल इमेजिंग मशीनों के साथ तापमान नियंत्रित इको सिस्टम लगाया जाएगा।
कैथ लैब शुरू होने के बाद यहां पेसमेकर और स्टेंट लगाने, एंजियोग्राफी, एंजियोप्लास्टी सहित हृदय से जुड़ी तमाम आधुनिक जांच और उपचार संभव हो सकेगा।
स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग पहले ही कैथ लैब की स्थापना के लिए आठ करोड़ रुपये की स्वीकृति दे चुका है। इसके अलावा 40 बेड वाले विशेष वार्ड और लैब के संपूर्ण विकास के लिए विभाग से 1.90 करोड़ रुपये अतिरिक्त मांगे गए हैं।
संभावना है कि नए वित्तीय वर्ष 2026-27 में सदर अस्पताल पूरी तरह से न्यूनतम चीड़-फाड़ वाली आधुनिक तकनीकों के साथ दिल के मरीजों का इलाज शुरू कर देगा। इससे न सिर्फ झारखंड बल्कि पड़ोसी राज्यों के मरीजों को भी लाभ मिलेगा।
कैथ लैब की स्थापना के बाद सदर अस्पताल पूर्वी भारत का पहला जिला स्तर का हार्ट ट्रीटमेंट सेंटर बन जाएगा। अस्पताल प्रबंधन ने बिड प्रक्रिया पूरी कर ली है और राशि स्वीकृत होते ही प्रशिक्षित स्टाफ की तैनाती की जाएगी।
गौरतलब है कि कैथ लैब के लिए टेंडर प्रक्रिया आसान नहीं रही। पहले तीन बार टेंडर निकाले गए, लेकिन एजेंसी का चयन नहीं हो सका। चौथी बार में विप्रो-जीई कंपनी का चयन संभव हो पाया।
सदर अस्पताल में हर महीने औसतन 125 हृदय रोगी ओपीडी में पहुंचते हैं, जबकि पिछले महीने 63 गंभीर मरीजों को भर्ती कर इलाज किया गया। अब तक कैथ लैब की सुविधा न होने के कारण गंभीर मरीजों को रिम्स रेफर करना पड़ता था।
रिम्स में हर महीने 100 से 150 एंजियोग्राफी और स्टेंटिंग होती हैं, जिससे वहां अत्यधिक दबाव और मरीजों को लंबा इंतजार करना पड़ता है। सदर अस्पताल में कैथ लैब शुरू होने से रिम्स पर हृदय रोगियों का बोझ काफी हद तक कम होगा।
बीपीएल और आयुष्मान भारत योजना के कार्डधारकों को सभी कार्डियक प्रोसीजर पूरी तरह मुफ्त उपलब्ध कराए जाएंगे। वहीं सामान्य मरीजों को भी सरकार द्वारा निर्धारित रियायती दरों पर इलाज मिलेगा, जो निजी अस्पतालों की तुलना में काफी कम होगा। इससे दिल की बीमारी से जूझ रहे मरीजों पर आर्थिक बोझ भी कम होगा।
सिविल सर्जन डॉ. प्रभात कुमार के अनुसार, “कैथ लैब शुरू होने से जिले के हृदय रोगियों को समय पर और बेहतर इलाज मिलेगा। विशेषज्ञ डॉक्टरों और प्रशिक्षित स्टाफ की तैनाती से सेवाओं की गुणवत्ता और बेहतर होगी।”
फिलहाल सदर अस्पताल के कार्डियोलॉजी विभाग में डीएम डॉ. राजेश कुमार झा, डॉ. अमित चतुर्वेदी, डॉ. धनंजय कुमार सिंह अपनी सेवाएं दे रहे हैं। आवश्यकता पड़ने पर सुपर स्पेशलिस्ट और अतिरिक्त प्रशिक्षित स्टाफ की भी नियुक्ति की जाएगी, जिस पर करीब 40 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे।










