अपनी दुर्दशा पर यूं आठ-आठ आँसू बहाने को विवश है ओरमाँझी का हलवादी

“विधायक, सांसद को कई बार आवेदन दिया गया है। लेकिन ठोस कदम नहीं उठाया गया है। जन प्रतिनिधि भोट के समय आते हैं और भोट खत्म होते ही गांव को भुल जाते हैं…

रांची दर्पण (मोहसिन)। ओरमांझी प्रखंड के ईचादाग पंचायत अंतर्गत हलबादी गांव एनएच 33 से 5 किमी दूर पर स्थित है। यहां बेदिया जन जाति समुदाय के साथ महतो समुदाय के लोग गरीबी का जीवन बसर करते हैं। लोगों को दिनचर्या के लिए मजदूरी के लिए चुटुपालू या पिस्का आना पडता है।

लेकिन एनएच-33 फोर लेन टोल प्लाजा से भुरकुंडा जाने वाले रास्ते पर यह गांव विकास के नाम पर काफी पिछड़ा हुआ है। सड़क की स्थिति बेहद अफ़सोसजनक है। जानकर हैरानी होगी कि गांव में किसी परिवार में कोई सदस्य बिमार होती है तो सरकार की बड़ी सफलता हासिल प्रदान करने वाले एम्बुलेंस तक नहीं पहुंचता है।

गांव के सरजू महतो कहते हैं कि बीमार व्यक्ति को किसी तरह पिस्का या अन्य अस्पताल तो ले जाते हैं। लेकिन सड़क के खराब होने कारण गर्भवती महिलाओं को अस्पताल ले जाने के क्रम में कई लोगों का जीवन खतरा में पड जाता है।

वहीं गांव के बिरजू महतो बताते हैं कि हम लोगों के गांव में खेती बाड़ी ही एक साधन है। जो सड़क के खराब के कारण बजार ले जाने के क्रम में सब्जियों में कीचड़ लग जाने के कारण सही किमत नहीं मिल पाता है।

महेश बेदिया, अजय बेदिया, विशाल बेदिया का कहना है कि गांव से लगभग 6 किलोमीटर दूर मध्य एवं उच्च विद्यालय पिस्का पढाई करने जाना पढता है। सड़क खराब होने के कारण साईकिल रहते हुए भी हमलोगों को पैदल जाना पड़ता है। जिससे पढ़ाई के लिए कम समय मिलता है और होम वर्क भी नहीं बना पाते हैं।

वहीं गांव के बसंति देवी की पीड़ा है कि सरकार द्वारा मिलने वाली राशन पिस्का मोड़ या कई कार्डधारियों को बरतुआ में संचालित जनवितरण दुकान से राशन लेने जाना पड़ता है। जो गाँव से 10 किलोमीटर दूर है।

किसी परिवार में दोपहिया या साईकिल नहीं होने के कारण लोगों को माथा पर ढोकर राशन लाना पड़ता है। वहीं सड़क के खराब होने के कारण लोगों को खाली पैदल चलना मुश्किल है। सड़क पर महिला /लाचार व्यक्ति राशन के लिए पैदल चलने पर मजबूर हैं।

गांव ग्राम प्रधान शिबु बेदिया बताते हैं कि यह सड़क दो जिले रांची और रामगढ़ को जोडती है। 3 साल पुर्व सड़क बना था लेकिन खराब मेट्रियल का उपयोग के कारण सड़क खराब हो गई है।

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