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Tuesday, September 21, 2021

यूं खंडहर में तब्दील पांचा स्वास्थ्य केन्द्र को 10 साल से उद्घाटन का इंतजार !

आज भी इस क्षेत्र के ग्रामीण झोलाछाप डॉक्टरों के भरोसे हैं, जिससे लोगों का आर्थिक दोहन तो होता ही है, उनके जान-माल का खतरा भी बना रहता है

pancha helth center 4ओरमांझी (मोहसिन)। प्रखण्ड के पांचा पहाड़ पर लगभग 3 एकड़ जमीन पर 10 साल पहले  सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बनाया गया था। इसका भवन बनाने में करोड़ों रुपए खर्च किए गए, मगर 10 साल बीत जाने के बाद भी इस केंद्र का उद्घाटन नहीं हो पाना दुर्भाग्य की बात है।

कहते हैं कि पूर्व केन्द्रीय मंत्री एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता सुबोध कांत सहाय जिस समय रांची के सांसद थे, उस समय इस स्थान पर सामुदायिक स्वास्थ्य भवन बनवाया था।

लेकिन ठीक उसी समय ओरमांझी प्रखण्ड के दूसरे स्थान पिस्का दुंडे में भी तात्कालीन मुख्य मंत्री अर्जुन मुंडा की सरकार ने भी करोड़ों  रुपए के समुदायिक स्वास्थ्य भवन बनवा डाली।

हालांकि एक साथ दो जगहों पर एक ही तरह के स्वास्थ्य केन्द्र कैसे चल सकता है? सरकारी खजाने के लुटेरों के लिए कोई मायने नहीं दिखे।pancha helth center 1

पांचा पहाड़ पर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बनना ही नहीं था। उस स्थान पर सरकार के अधिकारियों से नेताओं की मिलीभगत से सामुदायिक केंद्र बना दिया।

नतीजतन, 10 साल गुजर जाने के बाद भी आज तक इसमें कभी कोई चिकित्साकर्मी नहीं बैठे, जो आसपास के मरीजों को इलाज कर सकें।

पांचा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कैंपस के अंदर 10-12 बड़े-बड़े बिल्डिंग बन के तैयार हैं। जिसमें 100 से अधिक बेड का हॉस्पिटल डॉक्टरों के ठहरने के लिए डॉक्टर क्वार्टर कैंटीन बनाए गए हैं। लेकिन आज पूरा परिसर काफी जर्जर अवस्था में है।pancha helth center 2

दरवाजे खिड़की सभी टूट कर गिर चुके हैं।  पानी के नल टूट फूट गए हैं। रूम के अंदर पानी जमा है। यही नहीं, चारों ओर 12 फीट की चारदीवारी  के बीच  कैंपस के अंदर झाड़ियां भर गई है।

लेकिन इसकी परवाह न तो अफसरों को है और न ही क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों को। कई सरकारें आई-गई, मगर कभी किसी ने इस पर कोई संज्ञान नहीं किया। जिसका खामियाजा स्थानीय लोगों को भुगतना पड़ रहा है।  

अब देखना है कि वर्तमान हेमंत सरकार की इस स्वास्थ्य केन्द्र की ओर नजरें कब हो पाती है। लोग इस सरकार से आस लगाए बैठे हैं कि यह अस्पताल खुल जाए। ताकि उन्हें मामूली बीमारियों में भी दूर-दराज भटकना न पड़े।

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