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Wednesday, September 22, 2021

कोरोना मरीज का शव लेने से परिजनों का इंकार, 11 दिन बाद प्रशासन ने दफनाया

विगत 25 मई को पश्चिम बंगाल जा रही बस पलट गई थी बीते 25 मई को सिकिदिरी घाटी में मुंबई से पश्चिम बंगाल जा रही बस पलट गई थी। इस बस में ज्यादातर मजदूर थे। इस हादसे में एक युवक की मौत हो गई थी। उसकी कोरोना जांच कराने के बाद पॉजिटिव रिपोर्ट आयी। इसके बाद शव रिम्स में ही रखा गया था

रांची दर्पण डेस्क। कोरोना महामारी का खौफ इतना है कि मरने के बाद परिजन शव लेने से इंकार कर दे रहे हैं। बीते दिन डोरंडा कब्रिस्तान में दफनाए गए शव के साथ भी ऐसा ही हुआ।

25 मई को सिकिदिरी घाटी में सड़क हादसे में पश्चिम बंगाल के एक मजदूर की मौत हो गई थी। मजदूर का शव रिम्स लाया गया। रिम्स में उसकी कोरोना की जांच की गई, रिपोर्ट पॉजिटिव आई।

प्रशासनिक अधिकारियों ने उसके परिजन से संपर्क कर इसकी जानकारी दी। इसके बाद परिजन ने शव लेने से इंकार कर दिया। परिजन ने लिखित रूप से यह भी सूचना दी कि वे अंतिम क्रिया में शामिल भी नहीं हो सकते हैं।

11 दिन तक उसका शव रिम्स में ही पड़ा रहा। शनिवार को जिला प्रशासन और वार्ड-44 के पार्षद व डोरंडा कब्रिस्तान कमेटी के लोग आगे आए।

डोरंडा कब्रिस्तान में उसके जनाजे की नमाज अदा की गई। नमाज में करीब दस लोग शामिल हुए। इसके बाद वहीं उसे सुपुर्दे खाक किया गया।

कहते हैं कि कोरोना संक्रमित इस शव को दफनाने के लिए कब्रिस्तान में 15 फीट गहरी कब्र खोदी गई। पहले कब्र को सेनेटाइज किया गया।

इसके बाद कब्रिस्तान के गेट व अन्य जगहों को भी सेनेटाइज किया गया है। गाइडलाइन के अनुसार सारी प्रक्रिया पूरी की गई।

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