41 हजार टैब में घुसे रघुवर दास को निकालने में खर्च होंगे 20 करोड़

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तत्कालीन अफसरों की लापरवाही और अदूरदर्शिता के कारण टैब से वीडियो शामिल कराने का खामियाजा सरकारी स्कूलों के बच्चे ही भुगतेंगे….”

रांची दर्पण डेस्क। सरकारी स्कूलों को दिए गए 41 हजार टैब से पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास के वीडियो हटाए जाएंगे। स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के मंत्री जगरनाथ महतो ने सभी टैब से पूर्व मुख्यमंत्री का वीडियो हटाने का आदेश दिया। विभाग ने उनकी स्वीकृति के बाद इससे संबंधित फाइल मुख्य सचिव को भेज दी।

बताया जाता है कि निर्माण के समय में ही वीडियो शामिल किए जाने के कारण उक्त वीडियो हटाने में प्रति टैब चार हजार रुपये से अधिक खर्च आ सकते हैं। ऐसे में वीडियो हटाने पर ही 16 करोड़ रुपये से अधिक का बोझ राज्य सरकार पर पड़ सकता है।

टैब लगभग 13 हजार रुपये की दर से खरीदे गए थे और अब वीडियो हटाने पर प्रत्येक पर चार हजार रुपये से अधिक खर्च हो जाएंगे। टैब स्कूलों से मंगाकर कंपनी को भेजने तथा वापस स्कूलों को भेजने पर जो खर्च आएगा वह अलग है।

जानकारों की मानें तो टैब आपूर्ति करनेवाली एचपी कंपनी से जब वीडियो हटाने को लेकर मंतव्य मांगा गया तो कंपनी ने इसमें बड़ी राशि खर्च होने की बात कही है। हालांकि यह राशि कितनी होगी यह स्पष्ट नहीं बताया गया है।

कंपनी ने इसे टाइम टेकिंग भी बताया है। ऐसे में टैब स्कूलों से वापस मंगाकर कंपनी को भेजने, वहां सभी में वीडियो हटाने तथा वापस मंगाकर दोबारा स्कूलों को भेजने में छह माह से अधिक समय लग सकता है। यदि ऐसा होता है तो इस दौरान ई-विद्यावाहिनी के तहत स्कूलों की रिपोर्टिग तथा शिक्षकों की उपस्थिति ठप हो जाएगी।

बताया जाता है कि कंपनी ने यह भी कहा है कि टैब से वीडियो हटाने के क्रम में बड़ी संख्या में टैब खराब भी हो सकते हैं। अनुमान लगाया जा रहा है कि इससे लगभग दस फीसद टैब खराब हो सकते हैं। ऐसे में सरकार को इतने और टैब खरीदने पर लगभग पांच करोड़ रुपये खर्च हो सकते हैं।

इस तरह वीडियो हटाने, परिवहन और नए टैब की खरीद में करीब 20 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। टैब खरीद पर रघुवर सरकार ने करीब 53 करोड़ खर्च किए थे।

विभागीय मंत्री ने अपने आदेश में इसपर सवाल उठाया कि कोई भी व्यक्ति मुख्यमंत्री के रूप में हमेशा नहीं रह सकता, ऐसे में मुख्यमंत्री का वीडियो टैब में शामिल नहीं किया जाना चाहिए था।

 जिस पदाधिकारी के लिखित या मौखिक आदेश से ऐसा किया गया तथा जो इसके लिए जिम्मेदार होंगे, उनके विरुद्ध भी कार्रवाई होगी।

स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने टैब खरीदने की जिम्मेदारी सूचना तकनीक विभाग के अधीन कार्यरत जैप आइटी को दी थी। स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने जब टैब में वीडियो शामिल करने के आदेश की जानकारी जैप आइटी से मांगी तो कहा गया कि तत्कालीन सचिव द्वारा इसका मौखिक आदेश दिया गया था। जैप आइटी ने किसी पदाधिकारी का नाम नहीं लिया।

ऐसे में यह सवाल उठता है कि किसके विरुद्ध कार्रवाई होगी। इस पैसे की बर्बादी का दोषी कौन है। वैसे नई सरकार इस मामले पर गंभीर है। शिक्षा मंत्री जगरनाथ महतो ने तो दोषी अधिकारी पर कार्रवाई की बात कह दी है।

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