कौन बना रहा है भ्रष्टाचार की ऐसी अर्द्धनग्न ईमारतें !

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यह कोई अस्पताल नहीं अपितु, लूट की अर्द्धनग्न ईमारत खड़ी की गई है, जो महज तीन साल में ही इतिहास बन गया। कौन नहीं जानता है, इस भ्रष्टाचार के बारे में। सब लोग जानते हैं। लेकिन देखने-सुनने-बोलने वाला यहां है कौन?………”

रांची (एक्सपर्ट मीडिया न्यूज नेटवर्क)। इन दिनों राजधानी रांची जिले के प्रायः सभी प्रखंड क्षेत्रों में हर ओर भ्रष्टाचार की अर्ध्दनग्न ईमारतों की भरमार देखने को मिलती है।

ओरमांझी प्रखंड के हरचण्डा गांव में नव निर्मित प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र भवन का हाल देखिए। यह भवन ओरमांझी प्रखंड मुख्यालय से बामुश्किल एक किमी की सार्वजनिक परिधि में वर्षों से अर्धनिर्मित हालत में ही खंडहर बन गया है। इसका रंग-रोगन छोड़ कर प्रायः कार्य पूरा हो गया लेकिन, यहां आने-जाने का कोई रास्ता ही नहीं होने के कारण भवन की कोई उपयोगिता नहीं रही और अभिकर्ता-अभियंता की जोड़ी सारी राशि डकार गए।

कहा जाता है कि भवन के आगे की रैयत ने खुद की जमीन पर मकान बना लिया है। यहां पर विभागीय तौर पर डीप बोरिंग कर उसमें समरसेबुल पंप भी लगाए गए थे, वह भी अब अतीत बन चुका है।

सवाल उठता है कि प्रस्तावित निर्माण स्थल के आगे-पीछे जब रास्ता ही न था तो फिर उसे यहां बनाने का औचित्य ही क्या था। विभागीय अभियंता द्वारा संवेदक को इस भवन का सौ फीसदी भुगतान किस आधार पर कर दिया गया ?

हर सबाल के जवाब में बस्ती वालों के मुंह से सिर्फ यही निकलता है कि यह कोई अस्पताल नहीं अपितु, लूट की अर्द्धनग्न ईमारत खड़ी की गई है, जो महज तीन साल में ही इतिहास बन गया। कौन नहीं जानता है, इस भ्रष्टाचार के बारे में। सब लोग जानते हैं। लेकिन देखने-सुनने-बोलने वाला यहां है कौन?

मुखिया से लेकर प्रमुख तक। कोई भी यह बताने को तैयार नहीं है या फिर उन्हें जानकारी नहीं है कि हरचण्डा गांव में नवनिर्मित अस्पताल किसकी पहल पर किसने बनवाया। उसका ठेकेदार कौन और कहां का है?

चिकित्सा प्रभारी कहते हैं कि उन्हें भी यह जानकारी नहीं है कि यह अस्पताल का निर्माण कहां से किसके द्वारा हुआ है। कभी जानकारी मिलती है कि जिला परिषद की ओर से बनाया गया है तो कभी कहा जाता है कि स्वास्थ्य विभाग की इंजीनियर सेल की तरफ से बनाया जा रहा है।

कुछ दिनों पहले इस मामले को एक बैठक में उठाया था। हाल ही में उन्हें यह जानकारी दी गई कि उस अस्पताल को हैंड ओवर लेना है लेकिन, बिना रास्ते के अस्पताल का औचित्य ही क्या है।

पंचायत समिति सदस्य के अनुसार अस्पताल की जमीन एक पाटीदार (वर्तमान मुखिया) का है और रास्ता दूसरे पाटीदार एक किसान की है। आश्चर्य की बात है कि एक तरफ बिना रास्ता के अस्पताल बनता गया और दूसरी तरफ किसान अपनी रैयती जमीन पर मकान।

उन्होंने कहा कि यहां इस तरह के निर्माण आम बात हो गई है। पता ही नहीं चलता है कहां, कौन, क्या बना रहा है। पिछले साल एक बैठक में ग्रामीणों ने जानकारी दी कि बरबे गांव में सरकारी जमीन पर एक भवन का निर्माण हुआ है।

उसके बारे में कभी बताया गया कि एजुकेशन सेंटर है तो कभी बताया गया कि हेल्थ सेंटर है। आज काफी जर्जर स्थिति में गांव वालों का गौशाला बन कर रह गया है।

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